Somvati Amavasya 2025 “अखंड सौभाग्य का वरदान: जानिए सोमवती अमावस्या की कथा”

सौभाग्य और समृद्धि का पावन मार्ग (Somvati Amavasya 2025)

Somvati Amavasya 2025 : सोमवती अमावस्या हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से, जिसमें सोमवार (शिव का दिन) और अमावस्या (नया चंद्रमा) का दिन शामिल होता है, व्यक्ति को अपार आशीर्वाद मिलता है और उसके जीवन से बाधाएं दूर होती हैं।इस वर्ष सोमवती अमावस्या 26 मई 2025, सोमवार को पड़ रही है।मान्यता है कि इस दिन शिव जी की पूजा करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है

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सोमवती अमावस्या से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं हैं। इनमें से एक प्रसिद्ध कथा में बताया गया है कि एक बार देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हुआ था। इस मंथन से अमृत निकला, जिसे देवताओं को पीना था। लेकिन असुरों ने भी अमृत पाने की इच्छा जताई। इस विवाद के कारण देवताओं और असुरों के बीच युद्ध छिड़ गया। इस युद्ध में देवताओं को पराजय का सामना करना पड़ा।


तब देवताओं ने भगवान विष्णु से मदद मांगी। भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया और असुरों को मोहित कर दिया। इस तरह से देवताओं ने अमृत प्राप्त कर लिया। लेकिन असुरों को भी थोड़ा सा अमृत मिल गया था।असुरों ने अमृत पीने के लिए छल किया। इस छल से भगवान शिव क्रोधित हो गए और उन्होंने अपने तीसरे नेत्र से असुरों को भस्म कर दिया। लेकिन अमृत के कुछ बूंदें पृथ्वी पर गिर गईं। इन बूंदों से हलाहल विष उत्पन्न हुआ।

यह विष इतना विषैला था कि संपूर्ण सृष्टि का नाश हो सकता था। तब भगवान शिव ने संपूर्ण ब्रह्मांड की रक्षा के लिए इस विष को पी लिया। लेकिन विष के प्रभाव से भगवान शिव का गला नीला पड़ गया, इसलिए उन्हें नीलकंठ भी कहा जाता है।इस घटना के बाद भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सोमवती अमावस्या का व्रत रखने की परंपरा शुरू हुई। माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान शिव की पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।somvati amavasya 2025

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