mahashivratri 2025 : महाशिवरात्रि पर मंदिर जाएं तो भगवान शिव की पूजा में भूलकर भी न करें ये 6 गलतियां!

mahashivratri 2025 :

mahashivratri 2025 : महाशिवरात्रि, भगवान शिव के भक्तों के लिए सबसे पावन और शुभ अवसरों में से एक है। इस दिन शिवभक्त दिनभर उपवास रखते हैं, रात्रि जागरण करते हैं और भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग पर जलाभिषेक व विशेष पूजन करते हैं। परंतु कई बार श्रद्धा के साथ-साथ अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां हो जाती हैं जो पूजा के नियमों के विरुद्ध होती हैं और इसका शुभ प्रभाव कम हो सकता है। जी हाँ! भगवान शिव सरलता और सहजता के देवता हैं, परंतु उनके पूजन में कुछ विशेष नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है।

mahashivratri 2025

इस ब्लॉग में हम आपको बताएंगे कि महाशिवरात्रि पर मंदिर में भगवान शिव की पूजा करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और कौन-सी गलतियां नहीं करनी चाहिए ।अगर आप महाशिवरात्रि के दिन मंदिर में जा रहे हैं या घर पर भगवान शिव की पूजा करने की सोच रहे हैं, तो यह ब्लॉग आपके लिए है! आइए जानते हैं वो 12 गलतियां, जिन्हें महाशिवरात्रि पर भूलकर भी नहीं करना चाहिए।

1. शिवलिंग पर हल्दी या कुमकुम चढ़ाना – सबसे बड़ी गलती!

अक्सर देखा जाता है कि भक्त भावनाओं में बहकर शिवलिंग पर हल्दी या कुमकुम चढ़ा देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये भगवान शिव की पूजा में वर्जित है? हल्दी माँ पार्वती का प्रतीक है और इसे सौंदर्य से जोड़ा जाता है, जबकि भगवान शिव त्याग और वैराग्य के देवता हैं। इसलिए शिवलिंग पर केवल जल, दूध, दही, बेलपत्र, भांग, धतूरा आदि चढ़ाना ही शुभ माना जाता है।

2. सूखे या फटे बेलपत्र चढ़ाना – भोलेनाथ हो सकते हैं नाराज़!

भगवान शिव को बेलपत्र अत्यंत प्रिय है, परंतु यह ध्यान रखें कि बेलपत्र पूरी तरह से ताजा और साफ-सुथरा हो। यदि बेलपत्र फटा हुआ या सूखा हो तो इसे शिवलिंग पर चढ़ाना अशुभ माना जाता है। बेलपत्र चढ़ाने से पहले इसे पानी से धोकर उसकी पवित्रता सुनिश्चित करें।

3. केतकी और चंपा के फूलों का प्रयोग न करें –

महाशिवरात्रि पर भगवान शिव को फूल अर्पित करने का विशेष महत्व है, लेकिन केतकी और चंपा के फूल चढ़ाना निषिद्ध है। कथा के अनुसार केतकी के फूल ने एक बार भगवान शिव के सामने झूठ बोलकर ब्रह्मा जी का पक्ष लिया था, जिससे भगवान शिव ने उसे अपने पूजन से वंचित कर दिया। इसलिए इन फूलों का प्रयोग भूलकर भी न करें।

5. कांसे के बर्तन से न करें जलाभिषेक।

भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए तांबे, पीतल या चांदी के बर्तनों का प्रयोग करना चाहिए। कांसे के बर्तन का जल शिवलिंग पर चढ़ाना वर्जित माना गया है। यह मान्यता है कि कांसे के बर्तन से जल चढ़ाने से पूजा का फल कम हो जाता है।

6. शिवलिंग पर तुलसी के पत्ते न चढ़ाएं**

भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है, लेकिन भगवान शिव की पूजा में तुलसी का प्रयोग वर्जित है। पुराणों के अनुसार, तुलसी माता का विवाह शंखचूड़ नामक असुर से हुआ था, जो भगवान शिव का विरोधी था। इसलिए शिवलिंग पर तुलसी के पत्ते अर्पित करना मना है।

Leave a Reply